Wednesday, April 27, 2011

तुम भी लिखो


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रात समंदर है
कितना सारा पानी इसके अन्दर है!

शोभा घारे के इस चित्र को देख कर मन में कई ख्याल आते हैं| दो पंक्तियाँ हमने लिखी हैं| आप भी कुछ लिखिए| अपनी पंक्तियाँ आप नीचे कमेंट्स(comments) में छोड़ सकते हैं|

1 comment:

  1. ooper kitne taare hain
    parchain jal ke ander hai

    machhliyon ke liye to jaise
    poora aakash hi jal ke andar hai

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