Tuesday, July 24, 2012

मच्छर और हाथी


सूंड उठाकर हाथी बैठा 
पक्का गाना गाने ,
मच्छर एक घुस गया कान में 
लगा कान खुजलाने ,
फट-फट फट-फट तबले जैसा 
हाथी कान बजाता ,
बड़े मौज से भीतर बैठा 
मच्छर गाना गाता |

Chakmak - Online Hindi Child Magazine

Friday, July 20, 2012

जून चकमक

कभी सोचा है की आइना आपको एक नयी दुनिया में ले जा सकता है | कितनी सुन्दर दुनिया होती है आईने की जानिए जून की चकमक में |

Wednesday, July 18, 2012

सतपुड़ा के घने जंगल

सतपुड़ा के घने जंगल 
नींद में डूबे हुए से
उंघते अनमने जंगल..............................
 दोस्तों क्या आप सतपुड़ा के जंगले के बारे में जानते हैं ? नहीं , तो जानिए जून माह की चकमक में | 

Sunday, July 15, 2012

ओ नन्हे बीज

ओ नन्हे बीज
तुझमें छिपा है 
एक बड़ा पेड़ 
खूब सुंदर फुल
मीठे मीठे फल 
हरी हरी पत्तियां 
चिड़िया के लिए घर
मजबूत मजबूत लकड़ियाँ 
आ में तुझे बू दूँ 

अक्षत चमोली उतरकाशी 

Saturday, July 14, 2012

जश्न-ए-बचपन

चकमक एक मासिक बाल विज्ञानं पत्रिका है | इसका पहला संकलन सन 1985 में प्रकाशित हुआ था | यह पत्रिका बच्चो की रचनाओ को सराहने के लिए प्रति माह प्रकाशित की जाती है | यह ११ से १४ साल के बच्चो के लिए सबसे अच्छी पत्रिका है, चकमक  एक माध्यम है जिससे बच्चो के मन में अपनी रचना को जागृत करने की रूचि जगाई जा सकती है | चकमक संकलन है कुछ कविताओ, कुछ कहानियों, और कुछ ऐसी रचनाओं का जिन्हें बच्चों ने लिखा है | बच्चों की रचनाओं में झलकता है उनका दृष्टिकोण, आस पास की दुनिया का गहरा अवलोकन | आज के बाल साहित्य में बच्चों की रचनाओं को अक्सर बहुत कम स्थान मिलता है, हमारी कोशिश रही है कि बच्चों की रचनात्मकता को माकूल जगह दी जाये क्योकि बच्चों को केवल कवितायेँ और कहानियाँ सुनाना. पढने देना ही पर्याप्त नहीं है उनकी अभिव्यक्ति को मंच देना भी उतना ही आवश्यक है | चकमक अपने 26 वर्ष बड़ी ही सफलता से पूरे कर चुका है इस मौके पर भोपाल में एक दिनी उत्सव "जश्न बचपन" आयोजित किया गया जिसमे गुलज़ार जी ने अपनी कविताये सुनाई | चकमक को उम्मीद है कि उसके पाठक चकमक से जुड़े रहेंगे |




Friday, July 13, 2012

भूखी

क्या तुम्ही ने खाए हैं
वे अलुचे जो
बर्फ की पेटी में थे
वे गायब है
और जिन्हें
में बचा रही थी
नाश्ते के लिए
में माफ़
नहीं करुँगी तुम्हे
बस एक ही
सवाल है
क्या वे मीठे थे
क्या वे मजेदार थे

रना चर्चिल  १३ वर्ष 

Wednesday, July 11, 2012

चकमक

बच्चो के नटखट बचपन में शामील होते है उनके विचार, कविता, लोककथा, चित्रकथा, कहानिया और कई विभिन्न रुप , बचपन की मौज मस्ती तो सूखे पेड़ो में भी रंग भर देती है | ऐसा ही कुछ संकलन पढिये चकमक में |

Tuesday, July 10, 2012

द ट्री ऑफ़ लाइफ

पड़िए एक माँ की कहानी - द ट्री ऑफ़ लाइफ सिनेमा पर आधारित एक कहानी | मई की चकमक में

Monday, July 9, 2012

चुटकुले

ग्राहक ने दुकानदार से कहा मुझे एक चूहा दानी चाहिए | 
अभी लाया साहब कहकर उसने चूहा दानी की और नज़र दोडाई  , ग्राहक ने अचानक बहार झाका बहार बस आ गयी थी उसने जल्दी में कहा जल्दी दो मुझे बस पकडनी है |
दुकानदार बोला - माफ़ करना इतनी बड़ी चूहेदानी तो हमारे पास नहीं है 

Sunday, July 8, 2012

हानास सूटकेस

दोस्तों चकमक आपकी मुलाकात करवाना चाहता है एक बेहद मार्मिक अंग्रेजी किताब से जिसका नाम है - हानास सूटकेस 
पढिये हानास सूटकेस हिंदी में मई की चकमक में |

Saturday, July 7, 2012

चकमक

दोस्तों आप सभी को चकमक बहुत पसंद है तो चकमक आपको बताना चाहता है की नयी चकमक आ गयी है आप उसे भी पढ़ सकते हैं | 
उस बुलाने के लिए :
लिंक - http://chakmak-blog.blogspot.in/
पता - इ -10, बी . डी. ए कालोनी, शंकर नगर, शिवाजी नगर, भोपाल, मध्य प्रदेश, इंडिया , 462016

Friday, July 6, 2012

डाक्टर के नाम एक मजदुर का ख़त

हम सभी लोग डॉक्टर के पास जाते हैं ताकि वो हमें झट पट ठीक कर सके पर एक मजदुर डॉक्टर से कुछ और ही कहना चाहता है , जानना चाहेंगे क्या ? तो पढिये
"डाक्टर के नाम एक मजदुर का ख़त " - मई चकमक में |

Wednesday, July 4, 2012

chutkule

एक आदमी ने देखा की एक बन्दर एक मछली को पकड़कर पेड़ पर ले जा रहा था |उसने बन्दर से कहा "ये तुम क्या कर रहे हो " 
बन्दर ने कहा में "मछली को डूबने से बचा रहा हूँ " |

Tuesday, July 3, 2012

दिल्ली


मेरी नयी अनोखी दिल्ली 
कूड़े करकट का भंडार 
यहाँ के रहने वाले लोग है
डेंगू के शिकार 
सरकार ने एलान किया
हास्पिटल बनवाएँगे 
पैसा नहीं है जिनके पास
फ्री इलाज करवाएँगे 


- तन्मय दिल्ली 

Monday, July 2, 2012

हाथी

जाड़ा मोटा हाथी,
सूंड में लाया पानी  |
रे पानी गन्दा,
उधर से आया चंदा |
उसके सिर पर टोपी,
माँ बनाती रोटी |
रोटी हम को खाने दो,
बहार घुमने जाने दो |

 - पप्पी सातवी म प्र 

Sunday, July 1, 2012

चकमक

चकमक एक बाल पत्रिका है | इसका पहला संकलन १९८५ में छपा था | ये पत्रिका बच्चो की रचनाओ को सराहने के लिए प्रति माह छापी जाती है |यह ११ से १४ साल के बच्चो के लिए सबसे अच्छी पत्रिका है , चकमक  एक माध्यम है जिससे बच्चो के मन में अपनी रचना को जागृत करने की रूचि जगाई जा सकती है | चकमक अपने २६ वर्ष बड़ी ही सफलता से पुरे कर चूका है और चकमक को उम्मीद है की उसके पाठक उसकी सदा ही प्रशंसा करते रहेंगे और उससे जुड़े रहेंगे |