Wednesday, April 25, 2012

बाप रे साँप

रात को अँधेरे में भूतों क दर से
में निकला था अपने पडोसी क घर से 
रास्ते में निकला था साँप लम्बा सा 
पास जाकर देखा तो में डर गया 
दूर से लग रहा था जो बिलकुल लकड़ी सा
पास जाकर देखा तो में डर गया 
मारे डर के पडोसी के घर भग गया
रात बीती और जब हुआ उजाला
तब कहीं में अपने घर को निकला

आदित्य तिवारी , कानपुर


Tuesday, April 24, 2012

चंदा मामा ठहरो थोडा - मेरा पन्ना

चंदा मामा ठहरो थोडा 
कहाँ चले तुम जाते हो ?
खेल रहे क्या आँख मिचोली
बादल में चिप जाते हो?

मुझे बोला लो में देखूंगा
कितने हो छुपने में तेज़ 
नहीं पकड़ पाओगे मुझको
में दौड़ूंगा तुमसे तेज़ 

नेहा दिल्ली 

Monday, April 23, 2012

रिमझिम रिमझिम बारिश आई

रिमझिम रिमझिम बारिश आई
हवा पकड़कर सरसर लाई
छाता ले निकले सब बच्चे
एक बच्चे ने छाता छोड़ा
तो सबने छाता छोड़ दिया
भीगने लगे सब बच्चे,
और मौज बनाने लगे सब बच्चे इस
अवनींद्र कुमार राय

Saturday, April 21, 2012

दादा दाल बाटी दे

दादा दाल बाटी दे
बेटा सुबह होने दे
सुबह कब होएगी?
जब सूरज दादा आएंगे
जब मुर्गा भैया बोलेगा
मुर्गा कैसे बोलेगा?
कुकडू - कू कूक्डू - कू.......
 सलमा, जयपुर राजस्थान 

Friday, April 20, 2012

चला चाँद से चंदू बनिया

बानरेंन्द्र
चला चाँद से चंदू बनिया
पहने अचकन और सुथनिया |
बन कर पूरा छेल चिकनिया
बोने को धरती पर धनिया |
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Thursday, April 19, 2012

इच्हा


  • अरुण कमल 

ऐसा तकिया होता 
चिडियों के पंखो - साइच्हा
जिस पर सिर रखते ही आते 
फल - फूलों के, नदी पहाड़ के सपने ...........

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Saturday, April 14, 2012

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