Monday, October 10, 2011

सपने

चलो उठो जरा सा हाथ दो
बादल हटाते है
वो उस तरफ जो दस तारे है
उनको पास लाते है

खड़े कर रास्ते लम्बे
पहाड़ो पे टिकाते है
सुना है लोग आसमानों पे
कुछ मुश्किल से जाते है

तुम्हे भी तो ये आते होंगे
हमको रोज आते है
सुबह उठते है इनको
सोचते है, मुस्कुराते है 

-सुशील कुमार शुक्ल

Saturday, October 8, 2011

बुलबुल के बच्चे

बुलबुल के थे अंडे तीन
उनसे निकले बच्चे तीन
मां उनको नादान समझती
लेकिन वे है बड़े जहीन
कल तक देख नहीं पाते थे
चीं चीं चीं चीं चिचियाते थे

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