किताब अंश - बोरेवाला- जयश्री कलत्तिल
डिफरेंट टेल्स क्षेत्रीय भाषा की कहानियाँ ढूँढ-ढूँढकर निकालता है, ऐसी कहानियाँ जो ज़िन्दगी की बातें करती हैं- ऐसे समुदायों के बच्चों की कहानियाँ जिनके बारे में बच्चों की किताबों में बहुत कम पढ़ने को मिलता है। कई सारी कहानियाँ लेखकों के अपने बचपन का बयान करते हुए बड़े होने के अलग-अलग ढंगों को प्रस्तुत करती हैं, प्राय: एक प्रतिकूल दुनिया में जहाँ वे हमजोलियों, पालकों और अन्य वयस्कों से नए सम्बन्ध बनाते हैं। ज़ायकेदार व्यंजनों, छोटे-छोटे जुगाड़ू खेलों, स्कूल के अनापेक्षित सबकों और दिलदार दोस्तियों के माध्यम से ये कहानियाँ हमें एक दिलकश सफर पर ले जाती हैं। इसी सीरीज़ की एक किताब के बारे में आज हम बता रहे हैं जिसका नाम है' बोरेवाला' इसे जयश्री कलत्तिल ने लिखा है। अंग्रेज़ी से हिंदी अनुवाद शशि सबलोक ने किया है। चित्रांकन राखी पेसवानी ने किया है। इस किताब के चित्रों में भी आपको एक अनूठापन मिलेगा। पेश है इस किताब के कुछ अंश। 'वहाँ छोटे-से बल्ब की मद्धम रोशनी में चाकप्रान्दन खड़ा नज़र आया। मैं जानती थी कि वो भूखा होगा और कुछ खाने की तलाश में आया होगा। अम्मा हमेशा उसे थोड़ी काँजी देती थीं। पर...