Thursday, April 19, 2012

इच्हा


  • अरुण कमल 

ऐसा तकिया होता 
चिडियों के पंखो - साइच्हा
जिस पर सिर रखते ही आते 
फल - फूलों के, नदी पहाड़ के सपने ...........

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चकमक

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