Wednesday, March 30, 2011

देखने को बहुत कुछ था

देखने को बहुत कुछ था|

जैसे:
पेड़,
उसका ताना,
उसकी टहनियां,
उसके पत्ते
जो हवा में लहराते थे,
फूल जो उस पर आते थे,
पक्षी जो उसी पेड़ पर घोंसला बनाते थे-
उन घोंसलों में छोटे-बड़े, चितकबरे अंडे, जो कुछ ही दिनों 
में पक्षियों में बदल जाते थे|
देखने को बहुत कुछ था
मेरी कल्पना में|
जैसे:

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