Wednesday, March 30, 2011

कऊआ उदास था

कऊआ उदास था|
उदास|  उदास|
कऊआ उदास था|
मुझे यह तो नहीं पता की यह क्यों उदास था, पर था वह उदास| मैंने उसकी आँखों में एक कातर भाव देखा था| इसमें कोई शक नहीं था की वह उदास था| कभी कभी उसके चेहरे पर गुस्सा चमकता था, फिर जल्दी ही वह उदास हो जाता था| गौरैय्या के बच्चे को गिद्ध की निगाह से देखता या उसके अण्डों को तोड़कर सुड़कता, वह उदास बना रहता था| उस वक़्त भी जब यह अन्य कऊओं से लड़ता-झगड़ता था या छत की मुंडेर पर काँव-काँव करता था, यह साफ़ नज़र आता था की वह उदास था| कभी एक तीर की तरह यह नदी की ओर जाता था| या थोड़ी देर किसी डाल पर शान्त बैठा रहता था| फिर उसी उदास भाव से उड़कर अगले कई घण्टों तक गायब हो जाता था| 

-रुस्तम सिंह 

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